द्रोणाचार्य प्रोग्राम | The Study IAS का व्यक्तिगत मेंटोरशिप सिस्टम

तैयारी को दें सही दिशा।
मेहनत से तय करें प्रीलिम्स 2026 का परिणाम।

UPSC की तैयारी में असफलता अक्सर ज्ञान की कमी से नहीं होती, बल्कि गलत दिशा, कमजोर फीडबैक और असंगठित प्रयास के कारण होती है।
द्रोणाचार्य प्रोग्राम उन अभ्यर्थियों के लिए है जो अपनी तैयारी को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, निरंतर समीक्षा और सुधार आधारित सिस्टम में बदलना चाहते हैं।
इस प्रोग्राम का लक्ष्य है : लगातार सुधार, कम गलतियाँ, और बेहतर परिणाम।

अभी जुड़ें
GS मंथन – UPSC करेंट अफेयर्स
प्रोग्राम ओवरव्यू

Prelims 2026 के लिए ट्रैनिंग सिस्टम

अधिकांश अभ्यर्थी पढ़ते बहुत हैं, पर सुधार बहुत कम होता है। क्योंकि उनकी तैयारी में कोई ऐसा सिस्टम नहीं होता जो यह बताए कि— कहाँ गलती हो रही है? किसे प्राथमिकता देनी है? और अगला कदम क्या होना चाहिए? द्रोणाचार्य प्रोग्राम इसी समस्या को हल करता है।

Current Affairs Classroom

द्रोणाचार्य एक मेंटोर-लेड परफॉर्मेंस सिस्टम है, जिसमें आपकी तैयारी को नियमित रूप से मॉनिटर किया जाता है,
गलतियों की पहचान की जाती है, और सुधार के लिए स्पष्ट दिशा दी जाती है।

यह प्रोग्राम “और पढ़िए” नहीं कहता। यह बताता है कि क्या सुधारना है, क्यों सुधारना है, और कैसे सुधारना है- ताकि आपकी तैयारी हर सप्ताह आगे बढ़े।

बैच/फीस

बैच का विवरण

हिन्दी माध्यम
मोड ऑफलाइन/लाइव-ऑनलाइन
माध्यम हिन्दी
प्रवेश प्रारंभ
फीस
₹22,000 (ऑफलाइन) ₹15,000 (ऑनलाइन)
English Medium
मोड ऑफलाइन/लाइव-ऑनलाइन
माध्यम English
प्रवेश प्रारंभ
फीस
₹15,000 (ऑफलाइन) ₹10,000 (ऑनलाइन)
फीस देखें / पे करें
तैयारी क्यों अटक जाती है

मेहनत के बाद भी असफलता क्यों?

ये हैं वे वास्तविक समस्याएँ जो अच्छे अभ्यर्थियों को भी पीछे रोक देती हैं।

सही योजना का अभाव

टाइमटेबल तो बनता है, पर वह चलता नहीं—वास्तविक एवं व्यावहारिक योजना नहीं मिलती।

क्रियान्वयन-योग्य फीडबैक नहीं मिलता

यही गलतियाँ बार-बार दोहराई जाती हैं—कोई स्पष्ट डायग्नोसिस या प्रायोरिटी फिक्स नहीं होता।

रिविज़न अव्यवस्थित रहता है

पढ़ा हुआ याद नहीं रहता, क्योंकि रिविज़न की कोई निश्चित प्रणाली नहीं होती।

प्रैक्टिस बिना उद्देश्य के

लिखना और हल करना होता है, पर यह तय नहीं होता कि उससे क्या सुधार होना चाहिए।

कमज़ोरियाँ जस की तस

सिलेबस आगे बढ़ता है, पर कमजोर हिस्से वही रहते हैं—कोई गैप मैपिंग नहीं।

आत्मविश्वास अस्थिर रहता है

क्योंकि तैयारी मापने योग्य नहीं होती—परिणाम अनपेक्षित रहते हैं।

जॉइन करें द्रोणाचार्य
प्रोग्राम स्ट्रक्चर

द्रोणाचार्य में आपको क्या मिलेगा

यह प्रोग्राम एक दोहराने योग्य सुधार चक्र पर आधारित है।

🧑‍🏫

मेंटर-लेड स्टडी सिस्टम

हफ्ते की योजना + दैनिक लक्ष्य—आपके स्टेज और टाइमलाइन के अनुसार

चलने वाला प्लान।
🔁

प्रदर्शन विश्लेषण

हर टेस्ट/उत्तर के बाद स्पष्ट विश्लेषण — कहाँ अंक कट रहे हैं और क्यों।

समस्या जड़ पर काम।
🧭

कमज़ोरी मापने वाली प्रणाली

बार-बार होने वाली गलतियों और कमजोर क्षेत्रों की पहचान।

कमज़ोरियाँ छिपती नहीं।
⚙️

आउटपुट-फर्स्ट प्रैक्टिस डिसिप्लिन

नियमित अभ्यास ताकि तैयारी “प्रोड्यूस” करे, सिर्फ “कंज़्यूम” नहीं।

आउटपुट कम्पाउंड होता है।

संरचित रिविज़न प्रोटोकॉल

साप्ताहिक/मासिक रिविज़न लूप—रिकॉल और रिटेंशन के लिए।

रिविज़न सिस्टम बनता है।
🧠

एपरीक्षा के अनुरूप मानसिक तैयारी

टाइम मैनेजमेंट, अटेम्प्ट स्ट्रैटेजी, दबाव में निर्णय।

परीक्षा-दिन की तैयारी
द्रोणाचार्य से शुरू करें
ट्रेनिंग सिस्टम

पहचानिए → सुधारिए → दोहराइए

द्रोणाचार्य सुधार को एक प्रक्रिया बनाता है, संयोग नहीं।

बेसलाइन मूल्यांकन

क्या फेल हो रहा है: कंटेंट, एप्रोच, टाइम या रिकॉल— इसकी पहचान की जाती हैं।

सुधार के स्पष्ट लक्ष्य

प्रति सप्ताह 1–2 प्रायोरिटी फिक्स और और प्रभावी सुधार बिंदु।

प्रैक्टिस + रिव्यू

हर प्रैक्टिस के मूल्यांकन से अगला प्रयास बेहतर बनता है।

स्टेबिलिटी

रिविज़न + अनुशासन से स्थिरता आती है।

आज ही द्रोणाचार्य से जुड़ें
डेमो लेक्चर
किसके लिए है

क्या द्रोणाचार्य आपके लिए सही है?

यह प्रोग्राम आपके लिए सही है यदि-

FAQs

द्रोणाचार्य प्रोग्राम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Join करने से पहले aspirants आमतौर पर ये सवाल पूछते हैं।

क्या द्रोणाचार्य क्लास कोर्स है या मेंटॉरशिप?

यह मेंटॉरशिप + परफॉर्मेंस सिस्टम है। इसमे कक्षाएं और टेस्ट दोनों ही होते हैं।

क्या स्टडी प्लान मिलेगा?

हाँ। प्लान रियलिस्टिक और ट्रैक करने योग्य होगा—आपके स्टेज के अनुसार।

इसमें सुधार कैसे होता है?

डायग्नोसिस → एक्शन प्लान → प्रैक्टिस → रिव्यू → रिविज़न साइकिल्स से।

यह शुरुआती या रिपीटर—किसके लिए है?

दोनों के लिए। शुरुआती को स्ट्रक्चर, रिपीटर को करेक्शन और ब्रेक-थ्रू।

हिन्दी और English मीडियम के लिए अलग अलग फीस क्यों?

हम समझते और पहचानते हैं, हिन्दी मीडियम और English मीडियम अभ्यर्थियों के पढ़ने का तरीका अलग है और, इसीलिए दोनों माध्यमों के अभ्यर्थियों के लिए हमारी शिक्षण पद्धति भी अलग है। जिसके कारण फीस में अंतर है।

अकेले तैयारी न करें। एक अनुभवी कोच के साथ तैयारी कीजिए।

अगर आपका अगला अटेम्प्ट आपके लिए महत्वपूर्ण है, तो आपकी तैयारी को स्ट्रक्चर, फीडबैक और रिपीटेबल सुधार चाहिए। मेंटर से बात करें और समझें द्रोणाचार्य आपकी तैयारी में कैसे फिट होगा।